नवरात्र के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

वाराणसी. मां दुर्गा की आराधना का महापर्व गुरुवार से शुरू हो गया है।देवी के नौ रूपों की पूजा इन नौ दिनों में की जाती है। पूरे देश की तरह ही वाराणसी के नौदुर्गा मंदिरों में भी भक्तों का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि नवरात्र में दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी के दर्शन का विधान है। वाराणसी में मां का मंदिर ब्रम्हा घाट पर स्थित है। नवरात्र के दूसरे दिन यहा भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

 

-ब्रह्मचारिणी  :- भगवती दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्मा का अर्थ है तपस्या। 

-तप का आचरण करने वाली भगवती जिस कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। 

-वेदस्तत्वंतपो ब्रह्म, वेद, तत्व और ताप ब्रह्मा अर्थ है। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है। 

-इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल रहता है।जो देवीके इस रूप की आराधना करता है उसे साक्षात परब्रह्म की प्राप्ति होती है।

-दुर्गा सप्तशती में स्वयं भगवती ने इस समय शक्ति-पूजा को महापूजा बताया है।  

 

मां को है लाल फूल पसंद 

-मां ब्रह्मचारिणी को ब्रहमा की बेटी कहा जाता है क्यों की ब्रहमा के तेज से ही उनकी उत्पत्ति हुई है। 

- मां ब्रह्मचारिणी का स्वरुप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाये हाथ में जप की माला और बाये हाथ में कमंडल है।

-मां के इस स्वरुप की आराधन करने पर शक्ति,त्याग,सदाचार,सयम और वैराग में वृद्धि होती है।

-मां को लाल फूल का चडाहावा बहुत पसंद है। मां को वैसे खीर और मलाई का यदि भोग लगाया जाए तो मां प्रसन्न होती है क्योंकि मां को दूध की चीजें पसन्द हैं।

-मां के तेज  की लीला अपरम्पार है ...यह आकर जो भी मुरादे मांगी जाती है वो जरुर पूरी होती है।