गुरसिख के जीवन में सेवा, सिमरन व सत्संग की बड़ी महत्ता : महात्मा गुरदेव सिंह


होशियारपुर, सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज की कृपा से संत निरंकारी सत्संग भवन असलामाबाद होशियारपुर में मुखी माता सुभदरा देवी जी के नेतृत्व में संत समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय प्रचारक महात्मा गुरदेव सिंह जी काकूवाल ने प्रवचन करते हुए कहा कि वह इंसान भाग्यशाली होता है जिसे सत्संग की घड़ीया नसीब होती है। सत्संग में आने से मन में परमात्मा को जानने की इच्छा प्रकट होती है, जिसके बाद इंसान सतगुरु की शरण में जाकर इस निरंकार प्रभु की जानकारी करके गुरसिख बन जाता है।  उन्होंने कहा कि सत्संग में आकर साधू का जो बोल आता है उन बोलों को कर्म रूप देकर जन जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज का भी यही संदेश है कि सतगुरु द्वारा मिले ज्ञान को अपने जीवन में ढालना है। जो सतगुरु का समय समय पर आदेश आता है उसको अमल में ढालते हुए दूसरों को प्रेरित करना है। उन्होंने गुरसिख के जीवन के बारे में विचार करते हुए कहा कि गुरसिख की रसना हमेशा ही इस निरंकार प्रभु की व्याख्या ही करती रहती है। गुरसिख के जीवन के लिए सेवा, सिमरन व सत्संग की महत्ता बहुत अधिक होती है। अंत में शिक्षक महात्मा देविंदर बोहरा जी ने मुखी माता सुभदरा देवी जी की तरफ से आए हुए संत महात्माओं का धन्यवाद किया। इस मौके पर सुनील कुमार ने मंच सचिव की भूमिका अदा की। इस अवसर पर सुखदेव स्वामी जी, प्रीत कमल, प्रदीप कुमार, निर्मल दास, कैप्टन हरी राम, गुरदेव चौधरी, बहन सुशील जी, बहन बेबी, नीलम, योगराज, आदि उपस्थित थे। 
फोटो साथ में मेल की गई है।